लगातार हो रही शिकायतो के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने कुछ दूकानो पर की छापेमारी

जिले में बीक रहे मिलावटी सामग्रीयो पर मौन साधे बैठे खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियो की लगातार हो रही शिकायतो और आलोचनाओ के बाद कोरिया कलेक्टर की फटकार पर हरकत आये विभाग ने कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर स्थित मेसर्स बालाजी जोधपुर राजस्थान स्वीट्स एण्ड नमकीन में गुणवत्ताहीन मिठाई, हीरामणि- केक विक्रय करने की उपभोक्ताओं की शिकायत पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने आज छापेमारी की। वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी विनोद कुमार गुप्ता, विकास लकड़ा, औषधि निरीक्षक प्रमोद कुमार पैंकरा और नमूना सहायक की टीम ने उपभोक्ता प्रदीप पाठक की उपस्थिति में जांच-पड़ताल की गई।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने जानकारी दी कि हीरामणी और मिल्क केक के नमूने जब्त कर परीक्षण और विश्लेषण के लिए नमूने राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, कालीबाड़ी रायपुर भेजे गए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी।
उपभोक्ताओं की शिकायत मिलने पर यह कार्रवाई की गई, जिसमें उपभोक्ताओं ने मिठाई की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। इस कदम से उम्मीद है कि खाद्य विक्रेताओं में सतर्कता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध होंगे।

मिलावटखोरो के हौसले बुलंद

जिले में दुकानों पर मिलावटी खाद्य सामग्री खुलेआम बिक रही है। इस बारे में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से मिलावटियों के हौंसले बुलंद हैं। ज्यादातर व्यापारी खुले आम मिलावट का गोरखधंधा कर रहे हैं। शहर में कई स्थानों पर खुले आम दूध, मसाले, मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थ बेचे जा रहे हैं।

सडक किनारे बिक रहे दूषित खाद्य सामग्री

मिलावटी और सड़क किनारे होने के कारण धूल मिट्टी इन खाद्य पदार्थों के दूषित होने की संभावना रहती है। ये खाद्य सामग्री कितनी सुरक्षित है ये कोई नहीं जानता, और ना ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा लंबे समय से शहर में कोई अभियान चलाकर खाद्य सामग्रियों के सेंपल लिए। इस कारण दूषित खाद्य सामग्री खाने से लोग बीमार पड़ रहे हैं, जिससे सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस समय वैसे भी मौसमी बीमारियों का सीजन चल रहा है, ऐसे में दूषित खाद्य सामग्री का उपयोग करना और भी खतरनाक है। पोस्ट आफिस के सामने से लेकर बैकुंठपुर थाने और अस्पताल के सामने प्रतिदन जिम्मेदार गुजरते हैं किन्तु लगता है आंख बंद करके आफिस जाते हैं साहब। दूसरी आरे शहर में हर सडक पर खुले में संचालित दुकानो की जाच नही की जाती हैं।

मिलावटखोरो पर नकेल कसने विभाग नही गंभीर

मिलावटी सामान बेचने वालों पर नकेल कसने की बात केवल कागज तक सिमट कर रह गई है। पूरे साल बिकते हैं मिलावटी खाद्य व पेय पदार्थ, लेकिन अधिकारियों की नींद केवल त्योहार के अवसर पर टूटती है। अभियान के दौरान खाद्य पदार्थों की जांच के लिए नमूना लिया जाता है, जिसकी रिपोर्ट महिने भर के बाद आती है। इस बीच दुकानदार मिलावटी सामान बेचकर निकल भी जाते हैं। कुल मिलाकर जांच के नाम पर केवल सरकारी आंकड़ा पूरा करने का काम चल रहा है। आम आदमी के स्वास्थ्य की चिंता किसी को नहीं है। हद तो यह कि शहर से लेकर गांव के चौक-चौराहे और बाजारों तक में बिक रही फल व सब्जियों में भी केमिकल का उपयोग हो रहा है। लौकी में इंजेक्शन देकर उसका साइज बढ़ाया जा रहा है। लेकिन उसके खिलाफ कौन जांच चलाए। विशेषज्ञों के अनुसार मिलावटखोर खाद्य पदार्थों में ऐसे-ऐसे पदार्थ मिलाते हैं, जिससे मूल खाद्य पदार्थ तथा मिलावटी खाद्य पदार्थ में भेद करना काफी मुश्किल हो जाता है।

किराना में लगातार मिलवट की खबरे

खाद्यान्न, दालें, गुड़, मसालों में कंकड़, पत्थर, मिट्टी, रेत, बुरादा आदि की मिलावट करते हैं। सरसों के तेल में आर्जिमोन तेल की मिलावट होती है। इससे आंखों की रोशनी जा सकती। इसी प्रकार चना, अरहर की दाल व बेसन में बटुरी दाल, बेसन व हल्दी में पीला रंग (मेटानिल), दालों में टेलकम पाउडर व एस्बेस्टस पाउडर तथा लाल मिर्च में रोडामाइन-बी की मिलावट की जाती है। पेय पदार्थ में निषिद्ध रंग व रंजक आदि मिलाए जाते हैं, जो यकृत संबंधित रोग, रक्त अल्पता व कैंसर का कारण बनते हैं। मिठाइयों पर लगाए जाने वाले वर्क की जगह एल्युमिनियम का उपयोग किया जाता है। चायपत्ती व कॉफी में लौह चूर्ण व रंग की मिलावट होती है।

शरीर पर पड़ रहा दुष्प्रभाव

आज घर घर में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी पहुॅच चुकी है जिम्मेदारो को इस बात से कोई लेना देना नही रह गया कि यह क्यो इतनी तेजी से फैल रहा है। खाद्य पदार्थों में मिलावट इतने शातिर तरीके से की जाती है कि उपभोक्ता के लिए मूल खाद्य पदार्थ तथा मिलावटी खाद्य पदार्थ में अंतर करना काफी मुश्किल हो जाता है। मिलावटी आहार का उपयोग करने से शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ता है और शारीरिक विकार उत्पन्न होने की आशंका बढ़ जाती है। अनेक स्वार्थी उत्पादक एवं व्यापारी कम समय में अधिक लाभ कमाने के लिए खाद्य सामाग्री में अनेक सस्ते अवयवों की मिलावट करते हैं, जो हमारे शरीर पर दुष्प्रभाव डालते हैं। खाने वाले तेल से टूथ पेस्ट तक और हल्दी सहित अन्य मसाले से लेकर दाल और चीनी तक में जमकर मिलावट हो रही है नजाने कौन कब कौन एैसे खादय सामग्रियो के वजह से गंभीर बिमारी का शिकार हो जाये।

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